क्या मैं भी ये कर सकता हु. बेहतर भविष्य के लिए. (Environment day myths and reality)

पिछले कुछ दिनों से मैंने देखा हैं की मेरे मित्र पर्यावरण की काफी चिंता करने लगे हैं शायद करनी भी चाहिए पर मैं इस तरह की चिंता को सिंथेटिक चिंता ही कहूंगा क्युकी जैसे ही पर्यावरण दिन जायेगा वैसे ही सारी चिंताएं भी ढेर हो जाएगी। ये कुछ  इस तरह हैं की १५ अगस्त के कुछ दिन पहले हमारी देशभक्ति जागृत हो जाती हैं और फिर साल भर हम सोचते भी नहीं.

कुछ पर्यावरण प्रेमी ऐसे भी मिल जायेंगे जो अपने जन्मदिन पर पेड़ लगाते हैं. हा मगर हर साल उसी गड्ढे में. क्युकी हम पेड़ सिर्फ इसलिए लगते हैं ताकि हमारी एक अच्छी सेल्फी आसके। हम ये कभी नहीं सोचते की मैं इस पेड़ को बड़ा करूँगा मैं उसे अपनी आने वाली पीढ़ी को दे सकु। "ये तो बड़ी बड़ी बाते लगती हैं " तो ठीक हैं छोटे छोटे काम करो। आप अपने ऑफिस से शुरुआत कर सकते हैं.

हम कितनी बार सोचते हैं की प्रिंटिंग के पहले लिखा हुआ ब्यौरा जाँच ले. हम पहले प्रिंट निकालते हैं और फिर जांचते हैं. "अरे मेरे एक प्रिंट से कोनसा आसमान टूट पड़ेगा " जी हा आपके एक प्रिंट से कुछ न होगा पर आपके जैसे काफी महानुभाव अगर ऐसे सोचे तो जरुरु टूट पड़ेगा.

ऑफिस की दूसरी वस्तु हैं पेन(कलम) जो अक्सर हम चाइना की इस्तेमाल करते हैं क्युकी सस्ती हैं और यूज़ एंड थ्रो हैं. अगर महीने में हम ४ पेन इस्तेमाल करे और ऐसे ही ऑफिस के १० लोग करे तोह ४*१० = ४० * १२= ४८० ये हिसाब एक ऑफिस का हैं. तो सोचिये हम भारत में कितना प्लास्टिक रोज फेंकते हैं।

तीसरी वस्तु हैं लाइट। एक छोटेसे कमरे में हम बैठते हैं लाइट लगते हैं , मगर नेचुरल लाइटिंग इस्तेमाल नहीं करते। खिड़किया बंद करके लाइट चालू रखके कोनसी होशियारी करते हैं हम.

 

ऑफिस वो जगह हैं जहां AC होता हैं. तो करलो इस्तेमाल "अपना क्या जाता हैं " खिड़किया नहीं खोलेंगे। जरा सोचिये मशीन की हवा और नेचुरल हवा। फर्क हैं भाई

चाय पीते है डिस्पोजल में और उसे फेक देते हैं सोचिये अगर हम अपना कप इस्तेमाल करे तो शायद साल भरमे हम ७३० प्लास्टिक के कप बचा ले.

आये दिन हम नए नए मोबाइल लेते रहते हैं मगर पुराने वाले को अपने पास याद की तोर पर रखते हैं। किसी को देते क्यों नहीं। आपके किसी को देने से एक मोबाइल कम खरीदेगा और पर्यावरण को उतना ही फायदा होगा।

लिखने को बहुत हैं पर समय की कमी के कारन बस इतना ही। आपको कुछ और भी पता हो तो कमेंट में लिखे की किस तरह से छोटी चीजों से हम बड़े काम कर सकते हैं जी हा समय आ गया हैं पर्यावरण के बारे में सोचने का। क्यों इस गर्मी में आप समझ ही गए होंगे की पृथ्वी के क्या हाल हैं और ऐसे ही चलता रहा तो वो दिन दूर नहीं जब हम तरस जाएंगे की कोई ऐसी जगह हो जहां हम साफ साँसे ले सके। कुछ कंपनी तो बोतल बंद हवा भी बेचने के फिरत में हैं। यकीं नहीं तो गूगल करके देख ले। सेल्फी के लिए नहीं अपने लिए पेड़ लगाए और हा सिर्फ पेड़ न लाये उसे जिलाए।